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यदि आपकी à¤à¤• फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब खà¥à¤²à¥€ है, तो आप आईयूआई की मदद से या नैचà¥à¤°à¤²à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट हो सकती हैं। हालांकि, अगर दोनों फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• है, तो आईवीà¤à¤« की जरूरत पड़ सकती है। आईवीà¤à¤« में लैब के अंदर à¤à¥à¤°à¥‚ण को विकसित किया जाता है और फिर छोटे इनसेमिनेशन कैथेटर के जरिठइसे गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के अंदर डाला जाता है।
आजकल पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट होना काफी मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो गया है। अमूमन हर 10 में से 2 महिलाà¤à¤‚ किसी न किसी वजह से इनफरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ से जूठरही हैं। कà¥à¤› महिलाओं की फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¤œà¥à¤žà¥…क हो जाती है जिसकी वजह से उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ कंसीव करने में दिकà¥â€à¤•त आती है।
अगर दोनों में से à¤à¤• à¤à¥€ फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब ठीक हो, तो उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वह फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट की मदद से मां बन सकती हैं। वहीं अगर दोनों ही टà¥à¤¯à¥‚ब में दिकà¥â€à¤•त हो, तो कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं से इस परेशानी को दूर करने की कोशिश की जाती है।
​फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• होने के कारण
कई कारणों से फैलोâ€à¤ªà¤¿à¤¯à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• हो सकती है लेकिन आमतौर पर पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफà¥à¤²à¤¾à¤®à¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¥€ डिजीज की वजह से à¤à¤¸à¤¾ होता है।
यौन संचारित रोग, पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफà¥à¤²à¤¾à¤®à¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¥€ डिजीज पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों में होने वाला à¤à¤• बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ है जो कि गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ और फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इस इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ की वजह से पेलà¥à¤µà¤¿à¤• हिसà¥â€à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦, घाव की वजह से सकार और यदि इलाज न किया जाठतो à¤à¤•à¥â€à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी हो सकती है।
इसके अलावा यूटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨, यौन संचारिक रोग के संकà¥à¤°à¤®à¤£, मिसकैरेज, पेट या पेलà¥à¤µà¤¿à¤• सरà¥à¤œà¤°à¥€ और à¤à¤‚डामेटà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ की वजह से à¤à¥€ फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• हो जाती है।
​बà¥â€à¤²à¥‰à¤• फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब में कैसे हों पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट
यदि आपकी à¤à¤• फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब खà¥à¤²à¥€ है, तो आप आईयूआई की मदद से या नैचà¥à¤°à¤²à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट हो सकती हैं। हालांकि, अगर दोनों फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• है, तो आईवीà¤à¤« की जरूरत पड़ सकती है।
आईवीà¤à¤« में लैब के अंदर à¤à¥à¤°à¥‚ण को विकसित किया जाता है और फिर छोटे इनसेमिनेशन कैथेटर के जरिठइसे गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के अंदर डाला जाता है। कà¥à¤› समय में पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी की ही तरह गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में à¤à¥à¤°à¥‚ण अपने आप विकसित होने लगता है और इसमें फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब का कोई काम नहीं होता है।
​फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• होने के लकà¥à¤·à¤£
आमतौर पर फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• होने पर कोई लकà¥à¤·à¤£ महसूस नहीं होता है। कई महिलाओं को लगता है कि अगर उनके पीरियडà¥à¤¯ रेगà¥à¤²à¤° आ रहे हैं, तो उनकी फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ बिलà¥â€à¤•à¥à¤² ठीक है लेकिन à¤à¤¸à¤¾ नहीं है। कंसीव करने की कोशिश करने तक और कोई परेशानी आने तक महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनकी टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• हैं।
कई बार फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• होने पर फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¤— उसमें अटक सकता है, इसे à¤â€à¤•à¥â€à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी कहते हैं।
​कैसे बच सकती हैं आप
अधिकतर मामलों में पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ की वजह से फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥â€à¤²à¥‰à¤• होती हैं लेकिन हर मामले में यौन संचारित संकà¥à¤°à¤®à¤£ ही नहीं होता है। सही समय पर निदान के लिठनियमित चेकअप करवाना जरूरी होता है। टà¥à¤¯à¥‚बल इनफरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ से बचने के लिठयह महतà¥â€à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। अगर यौन संचारित संकà¥à¤°à¤®à¤£ या पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ का सही समय पर पता चल जाà¤, तो टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट से सà¥â€à¤•ार टिशà¥â€à¤¯à¥‚ को पैदा होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
इसका मतलब यह है कि किसी à¤à¥€ तरह की इनफरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ की पà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥â€à¤²à¤® को दूर करने के लिठसबसे सही तरीका समय पर निदान और इलाज लेना ही है।
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